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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
स तस्य दमशौचाभ्यां विक्रान्तेन च कर्मणा |  ५   क
सम्यक्चैवोपचारेण गौतमः प्रीतिमानभूत् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति