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मौसल पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
कर्कोटको वासुकिस्तक्षकश्च; पृथुश्रवा वरुणः कुञ्जरश्च |  १४   क
मिश्री शङ्खः कुमुदः पुण्डरीक; स्तथा नागो धृतराष्ट्रो महात्मा ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति