आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

स तु भाराभिभूतात्मा काष्ठभारमरिन्दम |  ९   क
निष्पिपेष क्षितौ राजन्परिश्रान्तो वुभुक्षितः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति