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सभा पर्व
अध्याय ५५
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विदुर उवाच
यद्वै पुरा जातमात्रो रुराव; गोमाय़ुवद्विस्वरं पापचेताः |  २   क
दुर्योधनो भारतानां कुलघ्नः; सोऽय़ं युक्तो भविता कालहेतुः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति