विराट पर्व  अध्याय ५५

कर्ण उवाच

अय़ं कौन्तेय़ कामस्ते नचिरात्समुपस्थितः |  १२   क
योत्स्यसे त्वं मय़ा सार्धमद्य द्रक्ष्यसि मे वलम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति