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विराट पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
उपासङ्गादुपादाय़ कर्णो वाणानथापरान् |  १९   क
विव्याध पाण्डवं हस्ते तस्य मुष्टिरशीर्यत ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति