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विराट पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पार्थो महावाहुः कर्णस्य धनुरच्छिनत् |  २०   क
स शक्तिं प्राहिणोत्तस्मै तां पार्थो व्यधमच्छरैः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति