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वन पर्व
अध्याय १४४
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भीमसेन उवाच
त्वां राजन्राजपुत्रीं च यमौ च पुरुषर्षभौ |  २३   क
स्वय़ं नेष्यामि राजेन्द्र मा विषादे मनः कृथाः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति