विराट पर्व  अध्याय ८

सुदेष्णो उवाच

वृक्षांश्चावस्थितान्पश्य य इमे मम वेश्मनि |  २२   क
तेऽपि त्वां संनमन्तीव पुमांसं कं न मोहय़ेः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति