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भीष्म पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
शिलीमुखाः पार्थधनुःप्रमुक्ता; रथान्ध्वजाग्राणि धनूंषि वाहून् |  ११२   क
निकृत्य देहान्विविशुः परेषां; नरेन्द्रनागेन्द्रतुरङ्गमाणाम् ||  ११२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति