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भीष्म पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
सर्वाणि सैन्यानि तु तावकानि; यतो यतो गाण्डिवजः प्रणादः |  ११६   क
ततस्ततः संनतिमेव जग्मु; र्न तं प्रतीपोऽभिससार कश्चित् ||  ११६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति