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भीष्म पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़ं च शरैस्तीक्ष्णैः कम्पय़ामास रोषितः |  ६२   क
मुहुरभ्युत्स्मय़न्भीष्मः प्रहस्य स्वनवत्तदा ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति