menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ये चान्येऽपि कुले सन्ति पुरुषा नो वरानने |  ३७   क
सर्वे ते वै गतिं यान्तु अभिमन्योर्यशस्विनः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति