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कर्ण पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
तत्र ते पार्थिवाः सर्वे शरवृष्टीः समासृजन् |  ३५   क
क्रोधरक्तेक्षणाः क्रूरा हन्तुकामा वृकोदरम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति