menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
सभाय़ामवहासस्य सर्वस्वहरणस्य च |  २१   क
वर्षमज्ञातवासस्य वनवासस्य चानघ ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति