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शल्य पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
इत्युक्त्वा राजशार्दूल गदामादाय़ वीर्यवान् |  २६   क
अवातिष्ठत युद्धाय़ शक्रो वृत्रमिवाह्वय़न् ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति