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उद्योग पर्व
अध्याय ४७
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सञ्जय़ उवाच
यदा द्रष्टा वालमवालवीर्यं; द्विषच्चमूं मृत्युमिवापतन्तम् |  २९   क
सौभद्रमिन्द्रप्रतिमं कृतास्त्रं; तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति