आदि पर्व  अध्याय ५६

जनमेजय़ उवाच

कथं सा द्रौपदी कृष्णा क्लिश्यमाना दुरात्मभिः |  ७   क
शक्ता सती धार्तराष्ट्रान्नादहद्घोरचक्षुषा ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति