menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
विराट पर्व
अध्याय ६१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
अय़ं कथं स्विद्भवतां विमुक्त; स्तं वै प्रवध्नीत यथा न मुच्येत् |  २०   क
तमव्रवीच्छान्तनवः प्रहस्य; क्व ते गता वुद्धिरभूत्क्व वीर्यम् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति