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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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सञ्जय़ उवाच
यत्र यात्येष तत्र त्वं चोदय़ाश्वाञ्जनार्दन |  ३०   क
मा सोमदत्तेः पदवीं गमय़ेत्सात्यकिं वृषः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति