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अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
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भीष्म उवाच
वाढमेवं ग्रहीष्यामि कामं त्वत्तो महामुने |  १७   क
व्रह्मभूतं कुलं मेऽस्तु धर्मे चास्य मनो भवेत् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति