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उद्योग पर्व
अध्याय ५६
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धृतराष्ट्र उवाच
काशय़श्चेदय़श्चैव मत्स्याः सर्वे च सृञ्जय़ाः |  ३३   क
विराटपुत्रो वभ्रूश्च पाञ्चालाश्च प्रभद्रकाः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति