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शान्ति पर्व
अध्याय ९१
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उतथ्य उवाच
धर्माय़ राजा भवति न कामकरणाय़ तु |  ३   क
मान्धातरेवं जानीहि राजा लोकस्य रक्षिता ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति