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शल्य पर्व
अध्याय ५६
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सञ्जय़ उवाच
वञ्चय़ित्वा तथा भीमं गदय़ा कुरुसत्तमः |  ४७   क
ताडय़ामास सङ्क्रुद्धो वक्षोदेशे महावलः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति