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आदि पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
सञ्चिन्त्यैवं तदा राजा विचार्य च पुनः पुनः |  ४१   क
अमोघत्वं च विज्ञाय़ रेतसो राजसत्तमः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति