menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आदि पर्व
अध्याय ५७
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
अतीव रूपसम्पन्नां सिद्धानामपि काङ्क्षिताम् |  ५७   क
दृष्ट्वैव च स तां धीमांश्चकमे चारुदर्शनाम् |  ५७   ख
विद्वांस्तां वासवीं कन्यां कार्यवान्मुनिपुङ्गवः ||  ५७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति