आदि पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

विद्धि मां भगवन्कन्यां सदा पितृवशानुगाम् |  ६१   क
त्वत्संय़ोगाच्च दुष्येत कन्याभावो ममानघ ||  ६१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति