आदि पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

पुरुषः स विभुः कर्ता सर्वभूतपितामहः |  ८७   क
धर्मसंवर्धनार्थाय़ प्रजज्ञेऽन्धकवृष्णिषु ||  ८७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति