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शान्ति पर्व
अध्याय ५७
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भीष्म उवाच
सर्वातिशङ्की नृपतिर्यश्च सर्वहरो भवेत् |  २७   क
स क्षिप्रमनृजुर्लुव्धः स्वजनेनैव वाध्यते ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति