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अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसाय़ाः फलं रूपं दीक्षाय़ा जन्म वै कुले |  ११   क
फलमूलाशिनां राज्यं स्वर्गः पर्णाशिनां भवेत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति