अनुशासन पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

भक्षान्नपानीय़रसप्रदाता; सर्वानवाप्नोति रसान्प्रकामम् |  ३७   क
प्रतिश्रय़ाच्छादनसम्प्रदाता; प्राप्नोति तानेव न संशय़ोऽत्र ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति