आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५७

उत्तङ्क उवाच

स भवान्मित्रतामद्य सम्प्राप्तो मम पार्थिव |  १२   क
स मे वुद्धिं प्रय़च्छस्व समां वुद्धिमतां वर ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति