menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ५७
chevron_left
chevron_right
दुर्योधन उवाच
जित्वा शत्रून्फलमाप्तं महन्नो; मास्मान्क्षत्तः परुषाणीह वोचः |  ४   क
द्विषद्भिस्त्वं सम्प्रय़ोगाभिनन्दी; मुहुर्द्वेषं यासि नः सम्प्रमोहात् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति