उद्योग पर्व  अध्याय ५७

दुर्योधन उवाच

रथो वेदी स्रुवः खड्गो गदा स्रुक्कवचं सदः |  १३   क
चातुर्होत्रं च धुर्या मे शरा दर्भा हविर्यशः ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति