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द्रोण पर्व
अध्याय ५७
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सञ्जय़ उवाच
ततः प्रणिहिते व्राह्मे मुहूर्ते शुभलक्षणे |  २०   क
आत्मानमर्जुनोऽपश्यद्गगने सहकेशवम् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति