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द्रोण पर्व
अध्याय ५७
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सञ्जय़ उवाच
येन देवारय़ः सर्वे मय़ा युधि निपातिताः |  ६५   क
तत आनीय़तां कृष्णौ सशरं धनुरुत्तमम् ||  ६५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति