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कर्ण पर्व
अध्याय ५७
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कर्ण उवाच
स्वमाय़ुधं चोपविकीर्य भूतले; धनुश्च कृत्वा सगुणं गुणाधिकः |  ६१   क
समानय़ानावजितौ नरोत्तमौ; शरोत्तमैर्द्रौणिरविध्यदन्तिकात् ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति