शल्य पर्व  अध्याय ५७

वासुदेव उवाच

पुनरावर्तमानानां भग्नानां जीवितैषिणाम् |  १३   क
भेतव्यमरिशेषाणामेकाय़नगता हि ते ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति