menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ५७
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
को न्वेष संय़ुगे प्राज्ञः पुनर्द्वन्द्वे समाह्वय़ेत् |  १५   क
अपि वो निर्जितं राज्यं न हरेत सुय़ोधनः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति