शल्य पर्व  अध्याय ५७

वासुदेव उवाच

दुर्योधनेन पार्थस्तु विवरे सम्प्रदर्शिते |  ३२   क
ईषदुत्स्मय़मानस्तु सहसा प्रससार ह ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति