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शल्य पर्व
अध्याय ५७
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वासुदेव उवाच
ववुर्वाताः सनिर्घाताः पांसुवर्षं पपात च |  ४६   क
चचाल पृथिवी चापि सवृक्षक्षुपपर्वता ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति