आदि पर्व  अध्याय ५८

वैशम्पाय़न उवाच

जातैरिह महीपाल जाय़मानैश्च तैर्मही |  २९   क
न शशाकात्मनात्मानमिय़ं धारय़ितुं धरा ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति