आदि पर्व  अध्याय ५८

वैशम्पाय़न उवाच

आश्रमस्थान्महर्षींश्च धर्षय़न्तस्ततस्ततः |  ३४   क
अव्रह्मण्या वीर्यमदा मत्ता मदवलेन च ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति