आदि पर्व  अध्याय ५८

वैशम्पाय़न उवाच

एवं वीर्यवलोत्सिक्तैर्भूरिय़ं तैर्महासुरैः |  ३५   क
पीड्यमाना महीपाल व्रह्माणमुपचक्रमे ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति