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आदि पर्व
अध्याय ५८
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वैशम्पाय़न उवाच
तदा निःक्षत्रिय़े लोके भार्गवेण कृते सति |  ५   क
व्राह्मणान्क्षत्रिय़ा राजन्गर्भार्थिन्योऽभिचक्रमुः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति