शान्ति पर्व  अध्याय ५८

भीष्म उवाच

उत्थानहीनो राजा हि वुद्धिमानपि नित्यशः |  १६   क
धर्षणीय़ो रिपूणां स्याद्भुजङ्ग इव निर्विषः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति