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शान्ति पर्व
अध्याय ५८
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो द्विजातीनभिवाद्य केशवः; कृपश्च ते चैव युधिष्ठिरादय़ः |  २९   क
प्रदक्षिणीकृत्य महानदीसुतं; ततो रथानारुरुहुर्मुदा युताः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति