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अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
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भीष्म उवाच
ऋत्विक्पुरोहिताचार्या मृदुव्रह्मधरा हि ते |  २४   क
क्षत्रेणापि हि संसृष्टं तेजः शाम्यति वै द्विजे ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति