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अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
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भीष्म उवाच
प्रिय़ाणि लभते लोके प्रिय़दः प्रिय़कृत्तथा |  ८   क
प्रिय़ो भवति भूतानामिह चैव परत्र च ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति