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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५८
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वैशम्पाय़न उवाच
काञ्चनस्रग्भिरग्र्याभिः सुमनोभिस्तथैव च |  ६   क
वासोभिश्च महाशैलः कल्पवृक्षैश्च सर्वशः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति